Jewellery Show: भारत का आभूषण उद्योग देश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। हाल के वर्षों में जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में आयोजित हुई ज्वैलरी एग्जिबिशन ने इस उद्योग को एक नई दिशा दी है। बिजनेस-टू-बिजनेस और बिजनेस-टू-कंज्यूमर स्तर पर आयोजित इन प्रदर्शनियों ने न केवल घरेलू बाजार में व्यापारिक गतिविधियों को गति दी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय आभूषणों (Jewellery) की मांग को बढ़ाया है। इन आयोजनों के माध्यम से छोटे और बड़े व्यापारियों को अपनी कला और तकनीक प्रदर्शित करने का एक समान अवसर प्राप्त हो रहा है। जयपुर में इंडिया सिल्वर ज्वैलरी शो (ISJS) का तीसरा संस्करण हाल ही में 30, 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को आयोजित किया गया था। द जैम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) द्वारा मुंबई में आयोजित आइआइजेएस भारत प्रीमियर (IIJS Bharat Premier) दुनिया का दूसरा और भारत का सबसे बड़ा आभूषण शो है। मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर और बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में लगा यह आयोजन भारतीय ज्वेलरी मार्केट को दिवाली, धनतेरस और आगामी वेडिंग सीजन के लिए पूरी तरह रीचार्ज कर देता है। राजस्थान की सिल्वर इंडस्ट्री को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने और सिल्वर ज्वैलरी के व्यापार को बूस्ट देने के लिए नवंबर 2026 में जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय जयपुर सिल्वर शो का फिर आयोजन किया जाएगा।
व्यापारिक आंकड़े और रिकॉर्ड भागीदारी
आइआइजेएस के अगस्त – 2026 के आयोजन में रिकॉर्ड संख्या में व्यापारियों और खरीदारों ने हिस्सा लिया। दुनिया भर से आए 80 से अधिक देशों के 5,000 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों (Foreign Buyers) सहित 61,000 से अधिक ट्रेड विजिटर्स ने इस प्रदर्शनी का दौरा किया। पूरे परिसर में 2,100 से अधिक प्रदर्शकों (Exhibitors) ने 3,600 से अधिक स्टॉल्स पर अपनी कारीगरी का प्रदर्शन किया। आयोजकों के अनुसार, इस पूरे आयोजन के माध्यम से ऑन-स्पॉट बुकिंग और भविष्य के ऑर्डर मिलाकर ₹70,000 करोड़ से अधिक का कुल कारोबार दर्ज किया गया। सोने की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए इस बार बाजार का झुकाव लाइटवेट और मॉडर्न आभूषणों की तरफ ज्यादा रहा। 14K और 18K कैरेट में बने 5 से 20 ग्राम के स्मार्ट-वेयर और डेली-वेयर ज्वेलरी की सबसे ज्यादा एडवांस बुकिंग देखी गई। इसके साथ ही, यूएसए, यूएई और यूरोपीय देशों के खरीदारों के साथ बड़े निर्यात सौदे तय हुए। कट और पॉलिश डायमंड्स की तुलना में स्टडेड गोल्ड और पारंपरिक ब्राइडल आभूषणों के बिजनेस में दोहरे अंकों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

तकनीकी प्रगति के बीच उद्योग का भविष्य
देश में हो रहे ज्वेलरी शो में केवल गहने ही नहीं, बल्कि आभूषण निर्माण में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीकों का भी बड़ा बाजार सजा रहता है। मशीनरी और टेक्नोलॉजी सेगमेंट में लेजर कटिंग, टेस्टिंग और ऑटोमेशन उपकरणों का भारी कारोबार होता है। इसके अलावा देखा गया है कि इन ज्वेलरी शो से लैब-ग्रोन डायमंड्स के प्रति भी व्यापारियों का रुझान बढ़ा है। कुल मिलाकर, आइआइजेएस प्रीमियर सहित जयपुर ज्वेलरी शो, जयपुर के सिल्वर सो और मुंबई में हुए सिल्वर शो सहित अहमदाबाद और बैंगलोर के ज्वेलरी शो ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय आभूषण उद्योग केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विशाल राजस्व उत्पन्न करने और अंतरराष्ट्रीय निर्यात को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रमुख जरिया बन चुका है।

जयपुर और अहमबादाद के एग्जिबिशन का प्रभाव
जयपुर को लंबे समय से कीमती पत्थरों और पारंपरिक आभूषणों की राजधानी माना जाता है। यहाँ आयोजित इंटरनेशनल जेम एंड ज्वैलरी शो और विभिन्न कुंदन-पोलकी एग्जिबिशन ने रंगीन रत्नों और हस्तशिल्प आभूषणों के व्यापार को बड़ा बढ़ावा दिया है। इन प्रदर्शनियों में दुनिया भर से आए अंतरराष्ट्रीय खरीदारों ने बड़े पैमाने पर खरीदारी की। इससे स्थानीय निर्माताओं और निर्यातकों को सीधे विदेशी बाजारों तक पहुँच मिली, जिससे जयपुर के आभूषण निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह से गुजरात का अहमदाबाद और गांधीनगर क्षेत्र सोने के आभूषणों के निर्माण का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। यहाँ आयोजित गुजरात गोल्ड ज्वैलरी शो जैसे बड़े व्यापारिक सम्मेलनों में सोने और लाइटवेट (कम वजन वाले) आभूषणों पर मुख्य ध्यान केंद्रित रहा। इन एग्जिबिशन के माध्यम से टियर-2 और टियर-3 शहरों के छोटे रिटेलर्स को देश के बड़े थोक निर्माताओं से सीधे जुड़ने का मौका मिला। इससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई और व्यापार में सुधार देखा गया।
व्यापारिक नेटवर्किंग और सप्लाई चेन में सुधार
हाल ही में देश के विभिन्न शहरों में कई ज्वेलरी प्रदर्शनी (Jewellery Show) आयोजित हुई हैं, जिनमें भारतीय आभूषण उद्योग को नए व्यापारिक अवसर प्रदान करने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को भी गति दी है। ज्वेलरी एग्जिबिशन का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ नेटवर्किंग के रूप में सामने आया है। एक ही स्थान पर निर्माताओं, डिजाइनरों, होलसेलर्स और रिटेलर्स की मौजूदगी से आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) अत्यंत सुगम हो गई है। व्यापारियों को नए सप्लायर्स और नई डिजाइनिंग तकनीकों के बारे में जानने का अवसर मिलता है। इसके अलावा, भारत में आगामी त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले लगने वाले ये शो व्यवसायियों को अग्रिम ऑर्डर बुक करने में बहुत मदद करते हैं। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से भारतीय ज्वेलरी बिजनेस में नए बदलाव तेजी से शामिल हो रहे हैं। वर्तमान समय में उपभोक्ता हल्के, दैनिक उपयोग के और मॉडर्न-फ्यूजन डिजाइनों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसकी जानकारी एग्जिबिशन से सीधे मिलती है। इसके साथ ही लैब-ग्रोन डायमंड्स और वर्चुअल ट्राई-ऑन जैसी डिजिटल तकनीकों के प्रदर्शन ने पारंपरिक व्यापारियों को तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया है। कुल मिलाकर, ये एग्जिबिशन भारतीय आभूषण व्यवसाय के सतत विकास और आधुनिकीकरण में अत्यंत उपयोगी साबित हो रही हैं।
– साक्षी त्रिपाठी
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